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रविवार, 11 अगस्त 2013

दो बाल कहानियां (स्‍वर 'बड़े भैया' विजय बोस का)

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'कॉफी-हाउस' में हर रविवार हम एक कहानी का पाठ लेकर प्रस्‍तुत होते हैं।

इस रविवार की प्रस्‍तुति पिछली तमाम प्रस्‍तुतियों से अलग और विशेष है।
आज हम आकाशवाणी इलाहाबाद की गुज़रे ज़माने की मशहूर आवाज़ 'बड़े भैया' यानी विजय बोस का स्‍वर लेकर उपस्थित हुए हैं। इलाहाबाद में पले-बढ़े लोगों को 'बड़े भैया' का प्रस्‍तुत किया बच्‍चों का कार्यक्रम 'बाल संघ' ज़रूर याद होगा। वो रेडियो का स्‍वर्णयुग था। और ये आवाज़ें बेहद मकबूल हुआ करती थीं।

बड़े भैया की आवाज़ में आज दो कहानियां प्रस्‍तुत की जा रही हैं।
विदित हो कि बड़े भैया की उम्र तकरीबन छियासी वर्ष है। और उन्‍होंने सीमित साधनों में बच्‍चों की इन कहानियों को रिकॉर्ड किया है। रिकॉर्डिंग पर उम्र का असर भले  नज़र आए.. पर इसमें आपको ऊर्जा की कमी कतई नज़र नहीं आयेगी। इन दोनों कहानियों के ज़रिये हम समय के ख़ज़ाने में इस स्‍वर को संजोने का प्रयास भी कर रहे हैं।

ये कहानियां संभवत: उन लोगों को बहुत ज्‍यादा लुभायेंगी--जिन्‍हें 'बड़े भैया' की आवाज़ का 'स्‍वर्ण-युग' देखा सुना है।

Story: Akalmand Hans (अकलमंद हंस)
Voice: Vijay Bose "Bade bhaiya"
Duration: 4 14


एक और प्‍लेयर (ताकि सनद रहे)

Story: Kaamchor Deepu (कामचोर दीपू)
Voice: Vijay Bose "Bade bhaiya"
Duration: 3 37


एक और प्‍लेयर (ताकि सनद रहे)


बड़े भैया के बारे में ज्‍यादा जानने के लिए आप इन दो लिंक्‍स पर जा सकते हैं।
रेडियोनामा की पोस्‍ट एक 
रेडियोनामा की पोस्‍ट दो 
यू-ट्यूब वीडियो ये रहा 

अगले महीने इक्‍कीस सितंबर को बड़े भैया अपना जन्‍मदिन मनायेंगे। हमारी कामना है कि वे शतायु हों।

डाउनलोड कड़ी:  अकलमंद हंस 
डाउनलोड कड़ी: कामचोर दीपू 


'कथा-पाठ' पर उपलब्‍ध अन्‍य कहानियां। जिन्‍हें सुना या डाउनलोड किया जा सकता है।
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी-'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी- 'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी--'एक छोटा-सा मज़ाक'
सियारामशरण गुप्‍त की कहानी - 'काकी'
हरिशंकर परसाई की कहानी -'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी- 'एक और तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी- 'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी ’ममता’ 

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'कॉफी-हाउस' में हर रविवार हम एक कहानी का पाठ लेकर प्रस्‍तुत होते हैं।

इस रविवार की प्रस्‍तुति पिछली तमाम प्रस्‍तुतियों से अलग और विशेष है।
आज हम आकाशवाणी इलाहाबाद की गुज़रे ज़माने की मशहूर आवाज़ 'बड़े भैया' यानी विजय बोस का स्‍वर लेकर उपस्थित हुए हैं। इलाहाबाद में पले-बढ़े लोगों को 'बड़े भैया' का प्रस्‍तुत किया बच्‍चों का कार्यक्रम 'बाल संघ' ज़रूर याद होगा। वो रेडियो का स्‍वर्णयुग था। और ये आवाज़ें बेहद मकबूल हुआ करती थीं।

बड़े भैया की आवाज़ में आज दो कहानियां प्रस्‍तुत की जा रही हैं।
विदित हो कि बड़े भैया की उम्र तकरीबन छियासी वर्ष है। और उन्‍होंने सीमित साधनों में बच्‍चों की इन कहानियों को रिकॉर्ड किया है। रिकॉर्डिंग पर उम्र का असर भले  नज़र आए.. पर इसमें आपको ऊर्जा की कमी कतई नज़र नहीं आयेगी। इन दोनों कहानियों के ज़रिये हम समय के ख़ज़ाने में इस स्‍वर को संजोने का प्रयास भी कर रहे हैं।

ये कहानियां संभवत: उन लोगों को बहुत ज्‍यादा लुभायेंगी--जिन्‍हें 'बड़े भैया' की आवाज़ का 'स्‍वर्ण-युग' देखा सुना है।

Story: Akalmand Hans (अकलमंद हंस)
Voice: Vijay Bose "Bade bhaiya"
Duration: 4 14


एक और प्‍लेयर (ताकि सनद रहे)

Story: Kaamchor Deepu (कामचोर दीपू)
Voice: Vijay Bose "Bade bhaiya"
Duration: 3 37


एक और प्‍लेयर (ताकि सनद रहे)


बड़े भैया के बारे में ज्‍यादा जानने के लिए आप इन दो लिंक्‍स पर जा सकते हैं।
रेडियोनामा की पोस्‍ट एक 
रेडियोनामा की पोस्‍ट दो 
यू-ट्यूब वीडियो ये रहा 

अगले महीने इक्‍कीस सितंबर को बड़े भैया अपना जन्‍मदिन मनायेंगे। हमारी कामना है कि वे शतायु हों।

डाउनलोड कड़ी:  अकलमंद हंस 
डाउनलोड कड़ी: कामचोर दीपू 


'कथा-पाठ' पर उपलब्‍ध अन्‍य कहानियां। जिन्‍हें सुना या डाउनलोड किया जा सकता है।
महादेवी वर्मा का संस्‍मरण--'गिल्‍लू'
भीष्‍म साहनी की कहानी-'चीफ़ की दावत'
मन्‍नू भंडारी की कहानी- 'सयानी बुआ'
एंतोन चेखव की कहानी--'एक छोटा-सा मज़ाक'
सियारामशरण गुप्‍त की कहानी - 'काकी'
हरिशंकर परसाई की कहानी -'चिरऊ महाराज'
सुधा अरोड़ा की कहानी- 'एक और तीन बटा चार'
सत्‍यजीत रे की कहानी- 'सहपाठी'
जयशंकर प्रसाद की कहानी ’ममता’ 

6 टिप्पणियाँ:

  1. स्कूली दिनों में एच०जी०वेल्स की ’टाइम मशीन’ पढ़ते समय उसकी बस कल्पना ही किया करते थे ....
    ...और जीवन में कभी सचमुच उसमें बैठकर समय-यात्रा के रोमांच की कामना भी !

    तब क्या पता था कि एक दिन यह सपना भी सच हो जायेगा
    ...बज़रिये ’कॉफ़ी हाउस’!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. एकदम से लगा...जैसे बालसभा ही सुन रहा हूँ....बाल-सभा की यादेँ गूँज रही है जेहन मे....!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बड़े भैया की आवाज में यह कहानियां सुनना बहुत बहुत सुखद लगा----भाई आज मैं जो कुछ भी हूं बड़े भैया की वजह से्। आदरणीय श्री विजय बिस जी यानि बड़े भैया ही वो व्यक्ति हैं जिन्होंने जुलाई 1976 में मेरी पहली कहानी "धुर्त भेड़िया" आकाशवाणी इलाहाबाद से बाल जगत में प्रसारित की थी।-----मेरी इस कहानी के प्रसारण का वकया भी मजेदार है। मैंने डाक से कहानी भेज दी थी। उस समय हीरा दीदी पेक्स थीं और बच्चों के कार्यक्रम की प्रोड्युसर थीं आदरणीया शांति मेहरोत्रा। मैं बी ए का विद्यार्थी होने के बावजूद बहुत छोटा दिखता था। जब साइकिल से आकाशवाणी पहुंचा तो शांति जी से मिला ।वहीं बड़े भैया भी बैठे थे। शांति जी ने मुझसे पूछा तुमने ये कहानी लिखी है? और इसे तुम पढ़ोगे---मैंने कहा हां। फ़िर स्टूडियो की तरफ़ हम बढ़े ---आगे आगे शांति जी और बड़े भैया--पीछे पीछे मैं और कुछ बच्चे। शांति जी ने भैया से कहा "ये लड़का तो बहुत छोटा है--पता नहीं इसी की कहानी है या नहिं? पढ़ पायेगा या नहीं।" भैया बोले हां इसी की है। और यही पढ़ेगा भी।----अंदर स्टूडियो में जाकर वहां का ताम झाम देख मेरी भी हिम्मत जवाब देने लगी। लाइव प्रसारण था। मन में डरा कहीं बीच में फ़म्बलिंग हुयी---कुछ गड़बड़ हुआ तो? भैया ने पूछा हेमन्त क्या सोच रहे? मैंने मन की बात बतायी और कहा कि भैया आज ये कहानी आप पढ़ दीजिये अगली बार से मैं पढ़ूंगा। भैया मुस्कुरा कर बोले " हेमन्त अब तो ये कहानी तुम्हें ही पढ़नी है। पढ़ो---कहीं गड़बड़ हुयी तो मैं सम्हाल लूंगा।" । उनके शब्दों ने मेरी नर्वसनेस को कुछ कम किया।---कार्यक्रम शुरू हुआ। जब कहानी की बारी आयी तो मैं ने कहानी पढ़नी शुरू की---हाथ में पेपर ----हाथ कांप रहे थे---पर मैंने भैया के शब्दों को दिमाग में रखते हुये पूरी कहानी बिना फ़म्बलिंग और ब्रेक के पढ़ा। बाद में स्टूडियो से बाहर आकर मैंने डरते डरते पूछा--भैया कहानी ----भैया बोले---"हेमन्त बहुत अच्छी पढ़ी तुमने----इतनी अच्छी कहानी सुनाते हो और मुझसे कह रहे थे पढ़ नहीं पाऊंगा।" तब तक शान्ति जी भी आ गयीं और उनके शब्द थे----भैया इस लड़के ने तो कमाल कर दिया---बहुत अच्छी तरह से सुनायी इसने कहानी।-----और इस तरह मेरी शुरुआत हुयी आकाशवाणी में बड़े भैया यानि आदरणीय विजय बोस जी की प्रेरणा,मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से। हेमन्त कुमार

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. शाबाश हेमंत शाबाश बहुत अच्छे बहुत अच्छे ऐसे ही कहते थे बड़े भैया कहानी /कविता/ चुटकुला सुनाने के बाद। अफसोस कि इतने दिनों बाद यह पोस्ट पढ़ रही हूँ। बड़े भैया सदा हमारी स्मृतियों में रहेंगे। उनकी करेला करेला वाली कोई पुरानी रेकार्डिंग होती तो कितना मजा आता!

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